- जिन शब्दों का प्रयोग संज्ञा या सर्वनाम शब्दों की विशेषता बताने के लिए होता है, विशेषण कहलाते हैं .
- विशेषण का शाब्दिक अर्थ है होता है- विशेषता बतलाना ।
जैसे-
अच्छा नेता, तीन पेन, नई पुस्तक इत्यादि।
इनमे अच्छा, तीन और नई शब्द विशेषण है जो विशेष्य की विशेषता बतलाने का काम करते हैं।
हिंदी में कितनें विकारी शब्द होते हैं ?- चार
- संज्ञा
- सर्वनाम
- विशेषण
- क्रिया
इन चारों विकारी शब्दों की विशेषता बतलाने वाले शब्दों को क्या कहते हैं ?
- संज्ञा और सर्वनाम शब्दों की जो विशेषता बताते हैं - विशेषण
- विशेषण शब्दों की जो विशेषता बताते हैं - प्रविशेषण
- क्रिया शब्दों की जो विशेषता बताते हैं - क्रिया-विशेषण
विशेषण के कितने अंग होते है?
विशेषण के तीन अंग होते हैं -
1. विशेष्य
2. विशेषक
3. प्रविशेषण
1- विशेष्य
जिस संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताई जाती है, वे विशेष्य कहलाते हैं।
अर्थात - जिस संज्ञा या सर्वनाम शब्द की विशेषता प्रकट की जाये, उसे विशेष्य कहते है।
जैसे-
यह घर सुंदर है .
वह फल मीठा है .
उपयुक्त विशेषण के उदाहरणों में 'घर' और 'फल' विशेष्य है क्योंकि इन्हीं की विशेषता बतायी गयी है।
2- विशेषक
जिन शब्दों का प्रयोग संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बतलाने के लिए होते है उन्हें विशेषक कहते हैं यानी कि विशेषण को ही विशेषक कहा जाता है।
जैसे -
पीला फूल, लाल पतंग।
इन वाक्यों में फूल की विशेषता पीला और पतंग की विशेषता लाल है यानी पीला और लाल विशेषक है या विशेषण है।
3- प्रविशेषण
जिन शब्दों के द्वारा विशेषण की विशेषता बताई जाती है , वे प्रविशेषण कहलाते है।
जैसे-
यह जगह बहुत अच्छी है।
मोहन पूर्ण स्वस्थ है।
उपर्युक्त वाक्य में 'बहुत' 'पूर्ण' शब्द 'अच्छी' तथा 'स्वस्थ' की विशेषता बतानें का काम कर रहे हैं , इसलिए ये शब्द प्रविशेषण है।
विशेषण (visheshan) के कितने भेद होते है ?
विशेषण के निम्नलिखित चार प्रकार होते है -
1- गुणवाचक विशेषण (Adjective of Quality)
2- संख्यावाचक विशेषण (Adjective of Number)
i. निश्चित संख्यावाचक
ii. अनिश्चित संख्यावाचक
3- सार्वनामिक विशेषण/सांकेतिक विशेषण (Demonstrative Adjective)
i. मौलिक सार्वनामिक
ii. यौगिक सार्वनामिक
4- परिमाणवाचक विशेषण (Adjective of Quantity)
i. निश्चित परिमाणवाचक
ii. अनिश्चित परिमाणवाचक
1- गुणवाचक विशेषण ( Gunvachak Visheshan )
जिन विशेषण शब्दों का प्रयोग संज्ञा या सर्वनाम शब्दों के गुण, दोष, दशा, स्वाद, स्थान, अवस्था, रूप-रंग, आकार आदि की विशेषता को प्रकट करने के लिए होता है , गुणवाचक विशेषण कहलाते है।
जैसे-
गुण- वह एक बुरा आदमी है।
आकार- उसका चेहरा गोल है।
रंग- काला टोपी, लाल रुमाल।
अवस्था- भूखे पेट भजन नहीं होता।
विशेषण में गुणवाचक विशेषण की संख्या सबसे अधिक है इनके कुछ उदाहरण निम्न हैं -
| काल : | पुराना, ताजा,, प्राचीन, अगला, भूत, वर्तमान, भविष्य मौसमी, आगामी आदि। |
| स्थान : | उजाड़, दायाँ, बायाँ, भीतरी, बाहरी, ऊपरी, स्थानीय, क्षेत्रीय आदि। |
| आकार: | गोल, पीला, चौकोर,लंबा, चौड़ा, सीधा, सुंदर आदि। |
| रंग : | सफेद, काला, नारंगी, हरा , फीका, चमकीला, धुंधला इत्यादि। |
| दशा : | गरीब, पालतू, रोगी, पतला, मोटा, गीला, सूखा, भारी, हल्का । |
| गुण : | उचित, अनुचित, दानी, न्याय, सच्चा, झूठा, दुष्ट, शांत । |
गुणवाचक विशेषण के कुछ उदाहरण
1. कमजोर पेड़ गिर गया।
2. हमने गुजराती गीत गाए।
3. बासी खाना फेक दो।
कमजोर, गुजरती और बासी शब्द संज्ञा शब्दों पेड़, गीत और खाना के गुण आदि को बता रहा है इसलिए ये गुणवाचक विशेषण है
2- संख्यावाचक विशेषण (Sankhyavachak Visheshan)
परिभाषा- जिन विशेषण शब्दों से संज्ञा और सर्वनाम शब्दों की संख्या की विशेषता का पता चलता है उसे संख्यावाचक विशेषण कहते हैं। संख्यावाचक विशेषण में संख्या का पता चलता है इसे हम गिन सकते हैं । परंतु इससे नाप-तौल नहीं सकते।
जैसे-
दो पेन, चार बन्दर, दस लोग इत्यादि।
यहां पर दो, चार और दस विशेषण शब्द है। जो क्रमानुसार पेन, बन्दर और लोगों की संख्या का बोध करा रहे हैं।
संख्यावाचक विशेषण के निम्न दो भेद होते हैं-
i. निश्चित संख्यावाचक विशेषण
ii. अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण
i. निश्चित संख्यावाचक विशेषण ( Nischit Sankhyavachak Visheshan)
जिन शब्दों का प्रयोग संज्ञा या सर्वनाम शब्दों की निश्चित संख्या बताने के लिए होता है , उन विशेषण शब्दों को निश्चित संख्यावाचक विशेषण कहते हैं ।
जैसे-1. पांचवा मकान मोहन का है।
२. गांव में दस हाथी घुस आए।
३. दोनों लोग आएंगे।
इन वाक्य में आए पांचवा, दस, दोनों शब्द निश्चित संख्या का बोध करा रहे है इसलिए ये निश्चित संख्यावाचक विशेषण है।
ii. अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण ( Anishchit Sankhyavachak Visheshan)
इन विशेषणों में संख्या का निश्चित पता नहीं चलता.
अर्थात
संज्ञा या सर्वनाम शब्दों की निश्चित संख्या का बोध ना करने वाले विशेषण शब्दों को अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण कहते हैं ।
जैसे:- कुछ, और, काफी, कम, बहुत, हर एक, प्रत्येक, कई इत्यादि।
उदाहरण
1.वहां बहुत बच्चे हैं।
2. कुछ लोग खेल रहे हैं ।
3. प्रत्येक व्यक्ति के पास दो पुस्तकें है।
यहां बच्चे, लोग और व्यक्ति की संख्या का पता नहीं चल रहा है। जहां बहुत, कुछ और प्रत्येक शब्द का प्रयोग किया गया है इसलिए ये अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण है।
3- सार्वनामिक विशेषण/सांकेतिक विशेषण (saarvnamik visheshan /Demonstrative Adjective in Hindi)
परिभाषा-
जिन सर्वनाम शब्दों को संज्ञा के आगे लगाकर उनके विशेषण के रूप में प्रयोग होता है, उन्हें सार्वनामिक विशेषण कहते हैं।
जैसे: मेरी कार , कोई बालक , किसी का घर , वे लड़के , वह बालक , वह मेज , वह गाय , वह लडकी आदि।
उत्पत्ति के आधार पर सार्वनामिक विशेषण को दो भागों में बांटा गया है -
i. मौलिक सार्वनामिक विशेषण ( Maulik sarvnamik visheshan )
जो सर्वनाम बिना किसी परिवर्तन के संज्ञा के पहले प्रयोग में आते हैं उन्हें मौलिक सार्वनामिक विशेषण कहते हैं.
जैसे -
1. यह आम।
2. कोई पुस्तक ?
3. वह बस है।
इन वाक्यों में यह, कोई, वह शब्द सर्वनाम है जिनका प्रयोग बिना किसी परिवर्तन के या बदलाव के संज्ञा शब्द आम, पुस्तक और बस के पहले आया है इसलिए ये शब्द मौलिक सार्वनामिक विशेषण है।
ii. यौगिक सार्वनामिक विशेषण ( yogik sarvnamik visheshan)
परिभाषा-
यौगिक का अर्थ दो शब्दों का मेल होता है जहां सर्वनाम शब्द और प्रत्यय शब्द जोड़कर एक नया सर्वनाम शब्द बनाया जाता है जैसे इस (सर्वनाम) + सा (प्रत्यय) = ऐसा, कौन + सा = कैसा।
जैसे-
1. ऐसा जानवर।
2. कैसी कार है?
इन वाक्यों में संज्ञा शब्द जानवर और कार के आगे यौगिक सार्वनामिक विशेषण शब्द लगा है।
4- परिमाणवाचक विशेषण ( Parimanvachak Visheshan)
जिन विशेषण शब्दों से किसी वस्तु के बारे में उसकी मात्र की विशेषता का बोध होता हो, वे परिमाणवाचक विशेषण कहलाते हैं।
ये शब्द किसी वस्तु की माप या उसकी मात्र का बोध कराता है।
जैसे- 'सेर' भर दूध, 'तोला' भर सोना, 'थोड़ा' पानी, 'कुछ' पानी, 'सब' धन, 'और' घी लाओ, 'दो' लीटर दूध, 'बहुत' चीनी इत्यादि।
(i) निश्चित परिमाणवाचक
(ii)अनिश्चित परिमाणवाचक
(i) निश्चित परिमाणवाचक ( Nishchit Parimanvachak Visheshan )
जो विशेषण शब्द किसी वस्तु की निश्चित माप-तौल अथवा मात्रा का बोध कराते हैं, उन्हें निश्चित परिमाणवाचक विशेषण कहते हैं।
जैसे- 'दस गज' जगह, 'चार किलो' दाल ।
(ii)अनिश्चित परिमाणवाचक ( Anishchit Parimanvachak Visheshan )
जिन विशेषण शब्दों का प्रयोग वस्तु की अनिश्चित मात्रा या माप-तौल का बोध कराने के लिए होता है , वे अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण कहलाते है।
जैसे- 'कुछ' धन, 'काफी' दूध, 'कम' पानी।
क्रिया शब्दों से विशेषणों की रचना -
| क्रिया | विशेषण |
| तैरना | तैराक |
| भूलना | भुलक्कड़ |
| चलना | चालू |
| लड़ना | लड़ाकू |
| पढ़ना | पढ़ाकू |
| खेलना | खिलाड़ी |
अव्यय शब्द से विशेषणों की रचना -
| क्रिया | विशेषण |
| पीछे | पिछली |
| आगे | अगला |
| नीचे | निचला |
| बाहर | बहरी |
| ऊपर | ऊपरी |
सर्वनाम और सर्वनामिक विशेषण में अंतर क्या होता है ?
संज्ञा के बदले प्रयोग होने वाले शब्द सर्वनाम कहलाते है जबकि यही सर्वनाम जब किसी संज्ञा के साथ विशेषण के रूप में प्रयोग होते है तो सर्वनामिक विशेषण कहलाते है,
जैसे:- वह खेल रहा है- में 'वह' सर्वनाम है ।
वह कार मोहन की है - में 'वह' 'कार' का विशेषण है।
नामिक विशेषण किसे कहते हैं ?
जब संज्ञा शब्दों का प्रयोग विशेषण की भांति होता है तब ये शब्द नामिक विशेषण कहलाते हैं.
जैसे:-बाल अवस्था, यमुना नदी, रामपुर गांव, चेन्नई शहर, पुलिस चौकी, हिमालय पर्वत, किसान भाई, राज्य सरकार, इत्यादि ।
विशेषण का संज्ञा की तरह प्रयोग कैसे होता है ?
कुछ विशेषण है जो संज्ञा की भांति प्रयोग किये जाते हैं संज्ञा की तरह प्रयोग होने पर विशेषण बहुवचन का रूप ले लेते हैं.
जैसे- बड़ों का कहना मानो।
हमारे वीरों ने शौर्य का प्रदर्शन किया।
गरीब भी जीना चाहते हैं।
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